
पश्चिम बंगाल में पहली बार भारतीय जनता पार्टी को विधानसभा चुनाव में जीत मिली है। इसी बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है , जिसमें रोते हुए कुछ लोगों को देखा जा सकता है। वीडियो में देखा जा सकता है कि कुछ लोगों को बस में बैठाकर ले जाया जा रहा है और उनके परिजन रो रहे हैं। वीडियो को शेयर कर दावा किया जा रहा है कि पश्चिम बंगाल में अवैध तरीके से रह रहे बांग्लादेशियों को बीजेपी सरकार ने वापस भेजना शुरू कर दिया है।
वायरल वीडियो के साथ यूजर ने लिखा है- कितना दुखद है, विपक्ष के वोटर को भर-भरकर बांग्लादेश के बॉर्डर पर बंगाल-असम से भेजना शुरू हो गया। अब ये कभी भी, कैसे जीतेंगे? सच में बहुत बुरा हो रहा है इन कंगलुओं के साथ… feeling sad for momota didi
अनुसंधान से पता चलता है कि…
पड़ताल की शुरुआत में हमने वायरल वीडियो के तस्वीरों का रिवर्स इमेज सर्च किया, परिणाम में वायरल वीडियो हमे ‘IndiaTodayNE’ के आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर मिला। वीडियो को 3 सितंबर 2024 को अपलोड किया गया था। इससे ये साफ है कि वायरल वीडियो हाल ही का नहीं है, पुराना है।

कैप्शन के अनुसार, असम के बरपेटा स्थित विदेशी न्यायाधिकरण ने विदेशी घोषित किए गए 28 लोगों को गोलपाड़ा के नजरबंदी शिविर में भेजने का आदेश दिया था। इनमें नौ महिलाएं और 19 पुरुष शामिल थे। इस समूह को भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच नजरबंदी शिविर में ले जाया गया था।


मिली जानकारी की मदद लेते हुए अधिक सर्च करने पर हमें अन्य एक रिपोर्ट मिला। 4 सितंबर 2024 को प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, असम पुलिस का कहना था कि बरपेटा जिले में विदेशी न्यायाधिकरणों की ओर से गैर-नागरिक घोषित किए गए 28 लोगों को गोलपाड़ा जिले के मटिया स्थित एक ‘ट्रांजिट कैंप’ में भेजा गया था। ये सभी लोग बंगाली मुस्लिम समुदाय से थे।

इसके अलवा इस खबर को यहां,यहां पर देखा जा सकता है।
बीजेपी के आते ही बंगाल की सड़कों का रंग भी बदला…
पश्चिम बंगाल में बीजेपी सरकार बनने के बाद राज्य की सड़कों, रेलिंग और बैरिकेड्स का रंग तेजी से बदला जा रहा है. तृणमूल कांग्रेस शासन की पहचान रहे नीले-सफेद रंग की जगह अब पीला-सफेद रंग किया जा रहा है. बीजेपी का दावा है कि यह बदलाव अंतरराष्ट्रीय और भारतीय सड़क सुरक्षा मानकों के अनुरूप है. पार्टी ने इसे नई सरकार के पहले सप्ताह की प्रमुख उपलब्धियों में शामिल किया है. ममता बनर्जी के कार्यकाल में नीला-सफेद रंग कोलकाता की पहचान बना दिया गया था और निजी भवनों को भी इसी रंग में रंगने पर टैक्स में छूट दी गई थी. विपक्ष इसे सरकारी खर्च पर राजनीतिक ब्रांडिंग बताता रहा. अब रंग बदलने को राज्य में सत्ता और प्रशासनिक प्राथमिकताओं में बदलाव के प्रतीक के रूप में देखा जा रहा है।

निष्कर्ष– तथ्य-जांच के बाद हमने पाया कि , लोगों को बस में लेकर जाने के नाम पर वायरल वीडियो को लेकर किया जा रहा दावा गलत है। यह वीडियो बंगाल का नहीं, बल्कि असम का पुराना वीडियो है, जिसे बंगाल के हालिया वीडियो के नाम पर शेयर किया जा रहा है।


