महिला के शरीर पर पुलिस की लाठी के निशान का दावा पूरी तरह फर्जी, एक पारंपरिक उपचार के दौरान हुए थे ये निशान।

हाल ही में 20 जुलाई 2026 को दिल्ली के जंतर-मंतर पर सीजेपी प्रदर्शन के दौरान संसद मार्च निकाल रहे प्रदर्शनकारियों और पुलिस बलों के बीच तीखी झड़प हुई थी, जिसमें कुछ कई घायल हुए थे। इसी घटना के संदर्भ में सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल किया जा रहा है, जिसमें एक महिला अपने गले और कंधे के निचले हिस्से पर बने गहरे लाल और बैंगनी रंग के चोट जैसे निशान दिखा रही है। दावा किया जा रहा है कि जंतर-मंतर पर सीजेपी के प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस के जवानों ने इस महिला को इतनी बेरहमी से पीटा की उसके शरीर पर जख़्म के ऐसे निशान हो गए। वायरल वीडियो को यह कैप्शन लिखते हुए शेयर किया गया है…
जंतर मंतर पर सरकार के द्वारा जो गुंडे भेजे जा रहे थे वो महिलाओं कों भी नहीं छोड़ रहे है…सबूत देख लीजिये.. इसे कोई दलाल मिडिया नहीं दिखायेगा ऐसे हालात
अनुसंधान से पता चलता है कि…
हमने जांच की शुरुआत में वायरल वीडियो से फ्रेम लेकर उसे गूगल लेंस से सर्च किया। परिणाम में हमें 25 फरवरी 2026 को इंस्टाग्राम पर साझा किया गया एक पोस्ट मिला, जिसमें वायरल वीडियो से मेल खाती हुई तस्वीर को शेयर किया गया था। पोस्ट में दी गई जानकारी के मुताबिक, यह कंबोडिया में अपनाई जाने वाली एक पारंपरिक प्राकृतिक चिकित्सा प्रक्रिया से संबंधित तस्वीर है। इससे इतनी बात यहीं समझ आती है कि इसका सीजेपी के किसी भी प्रदर्शन से कोई संबंध है ही नहीं।

फिर हमें वायरल क्लिप का मूल वर्जन कंबोडियाई इंस्टाग्राम यूजर @tolakity के अकाउंट पर 10 जनवरी 2026 को अपलोड किया हुआ मिला। इस पोस्ट के कैप्शन में यूजर ने खुद स्पष्ट किया है कि उनके साथ किसी भी तरह की हिंसा या मारपीट नहीं हुई। बल्कि यह सर्दी-जुकाम के इलाज के लिए अपनाया गया एक कंबोडियाई पारंपरिक तरीका है, जिसे स्क्रैचिंग द विंड कहा जाता है।
पड़ताल में आगे हमें एक अन्य इंस्टाग्राम अकाउंट मिला, जिसके वीडियो में भी एक महिला को यही थेरेपी लेते देखा जा सकता है। पोस्ट के अनुसार, सर्दी, जुकाम और सिरदर्द से राहत पाने के लिए कंबोडिया में यह प्राकृतिक इलाज किया जाता है। इसमें त्वचा पर बाम या नारियल तेल चुपड़कर सिक्के या चम्मच की मदद से हल्के हाथों से रगड़ा जाता है।
निष्कर्ष
तथ्यों की जाँच से यह पता चलता है कि वायरल वीडियो के साथ किया जा रहा दावा पूरी तरह गलत है। असल में यह वीडियो दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए सीजेपी (CJP) के प्रदर्शन से संबंधित नहीं है, बल्कि कंबोडिया की एक पारंपरिक उपचार पद्धति ‘स्क्रैचिंग द विंड’ के दौरान शरीर पर बने निशानों का है।


