बंगाल में BJP की रैली में शामिल होने पर युवकों की पिटाई का दावा गलत, वायरल वीडियो पुराना ….

Misleading Social

पश्चिम बंगाल में 23 अप्रैल को पहले चरण के मतदान हुए और दूसरे चरण का मतदान 29 अप्रैल को सम्पन्न हुआ। इसी से जोड़ते हुए कुछ लोगों पर लाठीचार्ज करती हुई पुलिस का एक वीडियो तेजी से वायरल किया गया है। दावा किया जा रहा है कि  बंगाल में  लड़कों का एक ग्रुप भाजपा की रैली में जा रहा था, तभी बंगाल पुलिस ने उन्हें बेरहमी से पीटा। साथ ही, उन पर बांग्लादेशी राष्ट्रगान गाने का दबाव डाला, लेकिन लड़कों ने ‘जन गण मन’ गाया।

वायरल वीडियो के साथ यूजर ने लिखा है- ममता बनर्जी और पश्चिम बंगाल पुलिस के कुछ हिस्सों की क्रूरता देखिए। पुरुषों के एक समूह को—जो कथित तौर पर उनके विरोधी थे और BJP की रैली में जा रहे थे—बुरी तरह पीटा गया और उन पर बांग्लादेश का राष्ट्रगान गाने का दबाव डाला गया। इस हमले के बावजूद, उन पुरुषों ने ‘जन गण मन’ गाना चुना; घायल होने पर भी वे अपनी बात पर डटे रहे। इसके बाद जो हुआ, उसने हालात और भी बदतर कर दिए, क्योंकि उनका यह कहकर मज़ाक उड़ाया गया कि “TMC से आज़ादी मिलने वाली नहीं है”! पश्चिम बंगाल में अभी यही हाल है 😭

फेसबुकआर्काइव

अनुसंधान से पता चलता है कि…  

पड़ताल की शुरुआत में हमने वायरल  वीडियो के तस्वीरों का रिवर्स इमेज सर्च किया। परिणाम में वायरल वीडियो से जुड़ी हमें 2020 की कई समाचार रिपोर्टें मिलीं। इनके अनुसार , वीडियो में फरवरी 2020 में दिल्ली दंगों के दौरान दिल्ली पुलिस कर्मियों द्वारा पुरुषों के एक समूह को राष्ट्रगान गाने के लिए मजबूर करने की घटना को दर्शाया गया है। साथ ही बताया गया कि, इस घटना में घायल हुए पांच लोगों में से एक की चोटों के कारण मौत हो गई थी। पीड़ित की मां ने मामले की जांच के लिए दिल्ली उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की थी।

इसी से साफ़ होता है कि वायरल वीडियो हाल का नहीं है।

मिली जानकारी की मदद लेते हुए आगे सर्च करने पर हमें टाइम्स ऑफ इंडिया प्लस’ के वेरिफाइड एक्स हैंडल पर एक पोस्ट मिला। जिसे दिल्ली का बताते हुए शेयर किया गया था। साथ ही, इस वीडियो में मृतक युवक की मां का बयान भी मौजूद है। उन्होंने दिल्ली पुलिस पर आरोप लगाते हुए कहा कि उनके बेटे को घायल होने के बावजूद दो दिनों तक पुलिस हिरासत में रखा गया और इस दौरान उसे चिकित्सकीय सहायता मुहैया नहीं कराई गई। बाद में पुलिसवाले उसे अस्पताल लेकर गए, लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका।

Theprint में प्रकाशित खबर के अनुसार  दिल्ली उच्च न्यायालय में 11 जनवरी 2022 को हुई इस मामले की नवीनतम सुनवाई में, पुलिस को एफआईआर संख्या 75/2020 के तहत 23 वर्षीय फैजान की मौत के मामले में अब तक की जांच पर एक विस्तृत और व्यापक रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया गया था।

इसलिए पूरी तरह से स्पष्ट हुआ जा सकता है कि उक्त घटना का संबंध बंगाल चुनाव से सम्बंधित नहीं है।

निष्कर्ष- तथ्य-जांच के बाद हमने पाया कि, लड़कों को पीटती पुलिस के वायरल वीडियो को लेकर किया जा रहा दावा गलत है। असल में यह वीडियो न तो हाल-फिलहाल का है और न ही बंगाल का है। यह वीडियो 2020 में दिल्ली दंगों के दौरान हुई हिंसा का है।

Result Stamp

Title: बंगाल में BJP की रैली में शामिल होने पर युवकों की पिटाई का दावा गलत, वायरल वीडियो पुराना ….

Fact Check By: Sarita Samal

Result: Misleading

Leave a Reply