बिहार के अस्पताल में हुई मारपीट के वीडियो को सोशल मीडिया पर बंगाल की घटना बताकर फैलाया जा रहा है।

False Political

मुजफ्फरपुर के अस्पताल में हुई पुरानी भिड़ंत का वीडियो, बंगाल के हालिया चुनाव से जोड़कर भ्रामक रूप में वायरल।

बंगाल के विधानसभा चुनाव में भाजपा को मिली प्रचंड जीत के बाद शुभेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली है। इसी बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ है। वीडियो को तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की महिला कार्यकर्ता का बताकर शेयर किया जा रहा है, जिसमें दिखाई दे रहा है कि एक महिला के सिर पर पट्टी बंधी है और वह मीडियाकर्मियों से बात करते हुए किसी घटना के बारे में जानकारी दे रही है। तभी वहां उपस्थित कुछ महिलाएं पट्टी को खींच देती हैं और मारपीट शुरु हो जाती है। यह वीडियो साझा करते हुए दावा किया जा रहा है कि चुनाव के बीच टीएमसी की महिला कार्यकर्ता चोट लगने का ड्रामा कर रही थी, जिसका बीजेपी की महिला कार्यकर्ताओं ने भंडाफोड़ कर दिया। वीडियो को इस कैप्शन के साथ शेयर किया जा रहा है…

ममता दीदी ने अपने TMC के लोगों को ये ड्रामा सिखाया है। मारपीट का झूठा नैरेटिव बनाकर जनता से सहानुभूति लेना। लेकिन, जनता अब सब जान चुकी है। सभी झूठ का पर्दाफाश हो चुका है।

फेसबुक पोस्टआर्काइव पोस्ट 

अनुसंधान से पता चलता है कि…

हमने जांच की शुरुआत में वायरल वीडियो के कीफ्रेम लेकर उन्हें गूगल रिवर्स इमेज की मदद से सर्च किया। परिणाम में हमें वायरल वीडियो मौर्य ध्वज एक्सप्रेस नाम के एक फेसबुक पेज पर मिला। यहां पर वीडियो को 6 मई 2026 को शेयर किया गया था। वीडियो के साथ कैप्शन के अनुसार, ‘बिहार के मुजफ्फरपुर के वीडियो को बंगाल’ का बताकर भ्रामक रूप से फर्जी अफवाह फैलाने की जानकारी दी गई थी। जबकि वीडियो श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (SKMCH) में एक मरीज के परिजनों और कर्मचारियों के बीच हुई लड़ाई का है, जब मरीज के परिजनों और कर्मचारियों के बीच स्ट्रेचर को लेकर विवाद हो गया था। बहस देखते ही देखते हाथापाई में बदल गई थी।

हमें मौर्य ध्वज एक्सप्रेस के फेसबुक पर इसी घटना से जुड़ी एक अन्य वीडियो 28 अप्रैल को पोस्ट की हुई मिली। जिसके साथ बताया गया था कि SKMCH में मरीज के परिजन द्वारा बबाल काटे जाने पर नरसिंग स्टॉप ने इमरजेंसी में काम काज ठप कर दिया था। मुजफ्फरपुर के श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल  के अस्पताल कर्मचारियों और एक मरीज के परिजनों के बीच विवाद हो गया था और दोनों पक्षों में हाथापाई भी हुई थी।

आगे खोज करने पर हमें मौर्य ध्वज एक्सप्रेस का यूट्यूब अकाउंट मिला। इस अकाउंट से 6 मई 2026 को अपलोड किया गया पूरा वर्जन मिला। वीडियो के साथ मौजूद डिस्क्रिप्शन और ऑडियो में इसे बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के एसकेएमसीएच का ही बताया गया है। ऑडियो में बताया गया था कि मारपीट की यह घटना मेडिकल कॉलेज में ट्रॉली मैन और मरीज के परिजनों के बीच हुई थी, जिसे बाद में वहां मौजूद लोगों की मदद से सुलझा लिया गया था। साथ ही ऑडियो में यह भी बताया गया था कि इसे मौर्य ध्वज एक्सप्रेस के एक रिपोर्टर ने ही रिकॉर्ड किया था, जिसे अब पश्चिम बंगाल के फर्जी दावे से शेयर किया जा रहा है। 

निम्न में वीडियो देखें।

हमने वीडियो की सत्यता को और अधिक स्पष्ट करने के लिए मौर्य ध्वज एक्सप्रेस के एडिटर ब्रह्मदेव कुशवाहा से भी संपर्क किया। उनके हवाले से हमें यह बताया गया था कि यह घटना उनके ही एक रिपोर्टर प्रेम शंकर ने रिकॉर्ड की थी। यह बिहार के एसकेएमसीएच अस्पताल का मामला है, जब परिजनों और ट्रॉलीमैन के बीच लड़ाई हो गई थी। उसी वीडियो को बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद हुई हिंसा से जोड़ा जा रहा है और झूठे रूप में शेयर किया गया है।

हालाँकि हमें इस घटना से जुड़ी और भी मीडिया रिपोर्ट्स मिली हैं जो यह स्पष्ट करते हैं कि उक्त घटना बंगाल से सम्बंधित नहीं है।

निष्कर्ष 

तथ्यों के जांच से यह पता चलता है कि वायरल वीडियो के साथ किया जा रहा दावा गलत है। वीडियो पश्चिम बंगाल का नहीं है, बल्कि बिहार के मुजफ्फरपुर का मामला है। यह घटना तब हुई थी जब अस्पताल कर्मचारी और मरीज के परिजनों के बीच विवाद हुआ था। उसी वीडियो को बीजेपी कार्यकर्ताओं द्वारा मारपीट में घायल होने का नाटक करने वाली टीएमसी की महिला कार्यकर्ता को एक्सपोज करने के फर्जी दावे से फैलाया जा रहा है।

Result Stamp

Title: बिहार के अस्पताल में हुई मारपीट के वीडियो को सोशल मीडिया पर बंगाल की घटना बताकर फैलाया जा रहा है।

Fact Check By: Priyanka Sinha

Result: False

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