
सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर किया जा रहा है, जिसमें एक व्यक्ति को बुरी तरह से रोते हुए देखा जा सकता है। साथ ही कुछ महिलाएं भी रोती हुई नज़र आ रही है। वीडियो को शेयर कर दावा किया जा रहा है कि यह वीडियो पश्चिम बंगाल में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशियों की एक बस्ती में हुई बुलडोजर कार्रवाई के बाद का है। वीडियो के साथ दावा किया जा रहा है कि बंगाल में बीजेपी की सरकार आने के बाद बुलडोजर कार्रवाई की शुरुआत हो गई।
वायरल वीडियो के साथ यूजर ने लिखा है- पश्चिम बंगाल में बांग्लादेशियों की बस्ती पर बुलडोजर एक्शन हो रहा है,यह सब वन विभाग और सरकारी जमीन पर बसे थे , वीडियो में पीछे देखिए एक व्यक्ति तो बांग्लादेश क्रिकेट टीम के जर्सी में खड़ा है
अनुसंधान से पता चलता है कि…
पड़ताल की शुरुआत में हमने वायरल वीडियो के तस्वीरों का रिवर्स इमेज सर्च किया । परिणाम में वायरल वीडियो हमें ‘Kaler Kantho Digital’ के फेसबुक पेज पर मिला। यहां पर इस घटना का पूरा लाइव वीडियो मौजूद है। यहीं पर वायरल वीडियो को 6 मिनट पर देखा जा सकता है। 20 मई के इस लाइव वीडियो में देखा जा सकता है कि भारी पुलिस बल की मौजूदगी में सड़क किनारे बनी दुकानों को तोड़ा जा रहा है।
रिपोर्ट के मुताबिक ये घटना बांग्लादेश के मीरपुर की है, जहां प्रशासन ने बौनियाबाद स्लम इलाके में अवैध कब्जों पर कार्रवाई की। कार्रवाई के दौरान पुलिस और लोगों में झड़प भी हुई थी।
इसके अलावा वायरल वीडियो हमें Sobar Kantha नाम के बांग्लादेशी न्यूज आउटलेट की इस फेसबुक पोस्ट में मिला । जिसे 20 मई 2026 को अपलोड किया गया था।
इस वायरल वीडियो को देखने पर हमें बैकग्राउंड में दुकान का एक बोर्ड नजर आया, जिसके ऊपर बांग्ला भाषा में “खान वस्त्र बितन” लिखा हुआ था।इसके साथ ही इस बोर्ड में दुकान का पता भी लिखा हुआ था, जिस पर “मीरपुर, ढाका, बांग्लादेश” लिखा था।

जांच में आगे हमने Google Maps पर इस दुकान को सर्च किया। गूगल मैप्स पर इस दुकान पर लगा साइनबोर्ड वायरल वीडियो में दिख रही जानकारी से मेल खा रहा था। इससे यह पुष्टि हो गई कि यह वीडियो बांग्लादेश का है, न कि पश्चिम बंगाल का।
हमने दोनों ही दुकान का विश्लेषण किया है। निम्न में विश्लेषण देखें।

बांग्लादेशी मीडिया में छपी रिपोर्ट्स के मुताबिक, बांग्लादेश के मीरपुर में अधिकारियों ने बौनियाबाद झुग्गी क्षेत्र में सरकारी जमीन पर बनी अवैध इमारतों को हटाने के लिए अतिक्रमण-विरोधी अभियान चलाया था। इस अभियान के दौरान निवासियों और पुलिस के बीच झड़पें हुईं थी।

निष्कर्ष – तथ्य-जांच के बाद हमने पाया कि, वायरल वीडियो पश्चिम बंगाल का नहीं बांग्लादेश का है, जहां सरकारी जमीन से अवैध कब्जे हटाने के लिए ये कार्रवाई की गई थी।


