
बुर्का पहने एक महिला और एक शख्स के बीच लड़ाई का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो को सांप्रदायिक एंगल के साथ शेयर कर दावा किया जा रहा है कि प्रयागराज में दबंगों ने एक मुस्लिम महिला पर खुलेआम तमंचा लहराया और फायरिंग की। वीडियो को शेयर कर यूजर सरकार पर निशाना साध रहे हैं।
वायरल वीडियो के साथ यूजर ने लिखा है- प्रयागराज में मुस्लिम महिला पर दबंगो ने कथित तौर पर खुलेआम तमंचा लहराते हुए फायरिंग करदी, और मुख्यमंत्री का कहना है की प्रदेश अपराधमुक्त हो गया है।
अनुसंधान से पता चलता है कि…
पड़ताल की शुरुआत में हमने वायरल वीडियो के तस्वीरों का रिवर्स इमेज सर्च किया। परिणाम में वायरल वीडियो की तस्वीर हमें इंस्टाग्राम पर मिला। जानकारी के अनुसार, बुधवार को ईसीपुर चौराहे के पास जमीन के सौदे को लेकर दो पक्षों में कहासुनी हुई। विवाद बढ़ने पर मारपीट शुरू हो गई और इसी दौरान एक युवक ने तमंचे से फायरिंग कर दी। गोली एक युवक की जांघ में लगी, जिससे वह घायल हो गया।

बताया जा रहा है कि जमीन के सौदे में एडवांस रकम देने के बावजूद रजिस्ट्री नहीं हो पाई थी। इसी बात को लेकर दोनों पक्षों के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था। सोमवार को पैसे मांगने पर यह विवाद हिंसक रूप ले लिया।
मिली जानकारी की मदद लेते हुए अधिक सर्च करने पर वायरल वीडियो की रिपोर्ट हमें ‘दैनिक भास्कर’ की वेबसाइट पर मिली। इस रिपोर्ट को 2 दिन पहले प्रकाशित किया गया था। रिपोर्ट के अनुसार, घटना प्रयागराज बहादुरपुर के झूंसी थाना क्षेत्र की है। घटना दो पक्षों के बीच पैसों और जमीन को लेकर हुए विवाद का है। दरअसल, दोनों पक्ष जमीन लेन-देन का सौदा कर रहे थे। एक पक्ष ने जमीन खरीदने के लिए एडवांस रकम भी दे दी थी, लेकिन फिर भी रजिस्ट्री नहीं हो पाई थी। इसी को लेकर दोनों के बीच हुए विवाद ने हिंसक रूप ले लिया।

हमें दावे से जुड़े ‘प्रयागराज न्यूज़’ की एक रिपोर्ट भी मिली, जिसमें इस घटना का पूरा ब्योरा और आरोपियों की पहचान बताई गई थी। रिपोर्ट के अनुसार आरोपियों की पहचान इस प्रकार हुई, 1. सोनू उर्फ समसुद्दीन अहमद (32) पुत्र स्वर्गीय फरमूद अहमद उर्फ बच्चे, निवासी इसीपुर मलावा खुर्द, झूंसी थाना क्षेत्र, जिला प्रयागराज। 2. इंजमाम (26) पुत्र कमरुल हसन उर्फ गुडडू निवासी 123 सदियाबाद बड़ा बघाड़ा, कर्नलगंज थाना क्षेत्र, जिला प्रयागराज।

और अधिक जानकारी के लिए, हमारी टीम ने झूंसी पुलिस थाने से संपर्क किया। पुलिस ने इस बात की पुष्टि की कि इस मामले में शामिल दोनों पक्ष मुस्लिम समुदाय से हैं। आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है, और उन्हें गिरफ्तार करके जेल भेज दिया गया है।
निष्कर्ष – तथ्य-जांच के बाद हमने पाया कि , वायरल वीडियो में कोई सांप्रदायिक पहलू नहीं है, और आरोपी व्यक्ति हिंदू नहीं हैं। यह घटना ज़मीन विवाद से जुड़ी है, और दोनों पक्ष एक ही समुदाय के हैं।


