उज्जैन में तोड़फोड़ करने वालों पर पुलिसिया कार्रवाई के वीडियो को फर्जी सांप्रदायिक दावे से किया जा रहा है शेयर।

Communal False

लड़कियों से छेड़छाड़ और मुस्लिम युवकों की पिटाई का नहीं है वीडियो, उत्पात मचाने वाले आरोपियों का पुलिस ने निकाला था जुलूस। 

सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें तीन युवकों को एक साथ बांधकर डंडे से पीटते हुए जुलूस निकाला जा रहा है। दावा किया जा रहा है कि ये तीनों लड़के मुस्लिम थें जिनको पुलिस ने लड़कियों के साथ छेड़छाड़ करने के आरोप में गिरफ्तार किया और पिटाई कर जुलूस निकाला। यूज़र ने वीडियो के साथ कैप्शन लिखा है …

मिलिए मोहम्मद समीर, मोहम्मद नदीम और मोहम्मद आसिफ अली से। उनका मुख्य काम कॉलेज के बाहर छात्राओं को परेशान करना था। उन्होंने स्कूल आनेजाने वाली लड़कियों की जिंदगी नरक बना दी थी। लेकिन पुलिस ने शानदार काम किया। उन्हें क्या सजा मिलनी चाहिए?

फेसबुक पोस्टआर्काइव पोस्ट 

अनुसंधान से पता चलता है कि…

हमने जांच की शुरुआत में वायरल से वीडियो से फ्रेम लेकर रिवर्स इमेज सर्च किया। परिणाम में हमें यह वीडियो उज्जैन संचार नाम के फेसबुक अकाउंट से 17 अप्रैल को अपलोड किया हुआ मिला। वीडियो के साथ लिखे कैप्शन के अनुसार, अज्ञात बदमाशों ने घरों पर हमला कर पत्थरबाजी करते हुए गाड़ियों में तोड़फोड़ की थी। जिससे इलाके में दहशत फैल गई। घटना की सूचना मिलने पर पुलिस ने किशन अहिरवार(20), पिता मगनलाल, विकास सरोनिया (25), पिता रमेश सरोनिया, विशाल (20), पिता रमेश चंद्र को गिरफ्तार किया था। 

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घटना से जुड़ी वीडियो रिपोर्ट को इंदौर-उज्जैन के स्थानीय मीडिया पोर्टल जन प्रकाशन के यूट्यूब अकाउंट से 17 अप्रैल को अपलोड किया हुआ देख सकते हैं। बताया गया है कि तोड़फोड़ की घटना में पुलिस ने मामले में पांच में से तीन आरोपियों किशन अहिरवार, विकास सनोरिया और विशाल को गिरफ्तार कर लिया गया था और दो अन्य आरोपियों ऋषि मिश्रा और साहिल गुर्जर फरार थे।

आगे पड़ताल में हमें 17 अप्रैल को दैनिक भास्कर की वेबसाइट पर प्रकाशित रिपोर्ट मिली। इसमें वायरल वीडियो वाले दृश्य को शेयर किया गया है। वहीं रिपोर्ट में बताया गया कि उज्जैन के ढांचा भवन क्षेत्र में 16 अप्रैल की देर रात 10-12 अज्ञात बदमाशों ने घरों पर हमला कर पत्थरबाजी की और गाड़ियों में तोड़फोड़ की।  घटना रात करीब एक बजे हुई जिसकी सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। इसके बाद 17 अप्रैल को करीब 5 बजे पुलिस ने तीन आरोपियों को मारते हुए उनका जुलूस निकाला था। इनमें गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान किशन अहिरवार, विकास सनोरिया और विशाल के रूप में हुई थी।

साथ ही इस मामले से जुड़ी एक रिपोर्ट नवभारत टाइम्स की वेबसाइट पर भी उपलब्ध है। जिसके अनुसार, एमआर-5 रोड पर कार वाशिंग सेंटर चलाने वाले शेरान अली ने कुछ असामाजिक तत्वों की गाड़ी धोने से इनकार कर दिया। इसी विवाद के बाद बदमाशों ने शेरान के आवास के बाहर खड़े वाहनों को निशाना बनाया और तोड़फोड़ की। घटना की सूचना स्थानीय लोगों द्वारा पुलिस को दी गई। जिसके बाद सीसीटीवी फुटेज खंगालने पर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए पांच में से तीन नामजद आरोपियों किशन अहिरवार, विकास सनोरिया और विशाल को गिरफ्तार किया और संबंधित मोहल्ले में उनका जुलूस निकाला।

रिपब्लिक भारत और एमपी के एक स्थानीय मीडिया संस्थान ने इस घटना पर वीडियो रिपोर्ट प्रसारित की है, जिसमें पुलिस के हवाले से चिमनगंज मंडी थाना क्षेत्र में हुई तोड़फोड़ मामले में गिरफ्तार किए गए आरोपियों के नाम किशन, विकास और विशाल ही बताये गए हैं। 

स्पष्ट है कि न तो वीडियो का संबंध लड़कियों के साथ छेड़खानी से है और न ही इसका संबंध किसी भी धर्म विशेष है। 

निष्कर्ष 

तथ्यों के जांच से यह पता चलता है कि वायरल वीडियो के साथ किया जा रहा दावा गलत है। वीडियो एमपी का है जब आरोपित युवकों ने तोड़फोड़ कर उत्पात मचाया था। जिसके लिए पुलिस ने तीनों की पिटाई कर उनका जुलूस निकाला था। उसी वीडियो को छात्राओं के साथ छेड़छाड़ की घटना व फर्जी सांप्रदायिक रंग देकर झूठ फैलाया जा रहा है।

Result Stamp

Title: उज्जैन में तोड़फोड़ करने वालों पर पुलिसिया कार्रवाई के वीडियो को फर्जी सांप्रदायिक दावे से किया जा रहा है शेयर।

Fact Check By: Priyanka Sinha

Result: False

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